राउरकेला में वनाग्नि रोकथाम पर डीएफओ की अपील
वनाग्नि रोकथाम केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। राउरकेला वन प्रभाग में बढ़ती जंगलों की आग की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने व्यापक पहल शुरू की है। इसी संदर्भ में राउरकेला वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) यशोवंत सेठी ने प्रेस वार्ता में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकांश वनाग्नि मानवजनित होती है। इसलिए, वनाग्नि रोकथाम के लिए जन जागरूकता और सक्रिय सहभागिता अनिवार्य है। यदि समय रहते कदम उठाए जाएं, तो जंगलों की आग से होने वाले बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।

वनाग्नि रोकथाम से पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण
डीएफओ ने बताया कि वनाग्नि रोकथाम से वन संपदा सुरक्षित रहती है। साथ ही, वन्यजीव और पक्षियों का जीवन भी बचाया जा सकता है।
जंगलों की आग से पेड़-पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त, कई दुर्लभ प्रजातियां भी खतरे में आ जाती हैं। इसलिए, जंगलों को आग से बचाना पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि विभाग ने वनाग्नि घटनाओं में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी और सामुदायिक दोनों उपाय अपनाए जा रहे हैं।
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जंगलों की आग रोकने के लिए तकनीकी उपाय
वॉच टावर और कैमरा निगरानी
वन विभाग वॉच टावरों पर आधुनिक कैमरे लगा रहा है। इससे वनाग्नि रोकथाम में त्वरित सूचना मिल सकेगी।
इसके अलावा, निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। इससे आग की घटनाओं पर शीघ्र नियंत्रण संभव होगा।
जल स्रोत संरक्षण और विकास
वन्यजीवों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। नालों और झरनों की सफाई तथा खुदाई की गई है।
इस पहल से गर्मी के मौसम में आग की संभावना भी कम होगी। साथ ही, वन क्षेत्र में नमी बनी रहेगी।
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