AYUSH Medical College Students Protest: राउरकेला में 1807 छात्रों का आमरण अनशन जारी

AYUSH Medical College Students Protest ओडिशा में लगातार तेज़ हो रहा है। राउरकेला सेक्टर-21 नया बाजार स्थित होम्योपैथी (आयुष) मेडिकल कॉलेज समेत राज्य के सात आयुष मेडिकल कॉलेजों के 1807 छात्र-छात्राओं ने 8 दिसंबर से आमरण अनशन शुरू किया है। इसके बावजूद, मंगलवार 9 दिसंबर को दूसरे दिन भी अनशन जारी रहा। हालांकि, राउरकेला में अनशनरत सोनाली कलसी और एक अन्य छात्रा की तबीयत बिगड़ गई। इसलिए, कॉलेज परिसर में डॉक्टरों की टीम के साथ पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
छात्रों की पाँच सूत्री मांगें
छात्रों के अनुसार, वे नवंबर से अपनी पाँच सूत्री मांगों को लेकर लगातार मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपते रहे। इसके अलावा, उन्होंने काला बैज पहनकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। फिर, 24 नवंबर से राज्यव्यापी कॉलेज बंद और 30 नवंबर से दिन-रात धरना शुरू किया। बावजूद इसके, सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इसलिए, छात्रों ने मजबूर होकर आमरण अनशन का रास्ता चुना।
राउरकेला में आंदोलन और छात्रों की नाराज़गी
छात्र नेताओं की सरकार से नाराज़गी
राउरकेला में अनशन पर बैठे स्मृति सागर बल और स्नेहा कुमारी ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। परिणामस्वरूप, छात्रों को आमरण अनशन का फैसला लेना पड़ा। छात्रों ने कहा कि देश का भविष्य माने जाने वाले मेडिकल विद्यार्थी ऐसी स्थिति में संघर्ष करने को मजबूर हैं।
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राज्य सरकार पर गंभीर आरोप
छात्रों का कहना है कि लगातार ज्ञापन देने और विरोध करने के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। साथ ही, आंदोलन के दौरान सफेद कोट पहनकर प्रदर्शन करने पर ब्रह्मपुर आयुर्वेद महाविद्यालय के एक छात्र को निलंबित कर दिया गया। इसलिए, छात्रों में असंतोष और बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन संवाद से बच रहे हैं।
केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
छात्र संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार आयुष सेक्टर के विकास के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है। हालांकि, राज्य सरकार छात्रों की न्यायोचित मांगों पर ध्यान नहीं दे रही, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ओडिशा के मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि आमरण अनशन के दौरान किसी भी छात्र की सेहत बिगड़ने पर इसकी पूर्ण ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
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🏁 Conclusion
अंत में कहा जा सकता है कि Protest अब गंभीर रूप ले चुका है। छात्रों की सेहत लगातार बिगड़ रही है और समाधान की तत्काल आवश्यकता है। इसलिए, सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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