भारत में एफडीआई का रिकॉर्ड स्तर

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत देने वाली खबर आई है। चार साल बाद पहली बार देश में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। हाल ही में अमेरिकी एजेंसी S&P Global ने भारत की क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड की थी और सरकार ने भी इकोनॉमी को बूस्ट करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
आरबीआई द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2025 में भारत में औसत एफडीआई बढ़कर 11.11 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है। इससे पहले जुलाई 2021 में एफडीआई का औसत 12.32 बिलियन डॉलर दर्ज हुआ था।
किस देश से आता है सबसे ज्यादा एफडीआई?
भारत में सबसे ज्यादा एफडीआई सिंगापुर से आता है। इसके बाद नीदरलैंड्स, मॉरिशस, अमेरिका और यूएई का स्थान है। कुल एफडीआई का करीब तीन-चौथाई हिस्सा इन्हीं देशों से आता है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर (जैसे कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर और बिजनेस सर्विसेज) में आ रहा है।
क्यों अहम है एफडीआई?
एफडीआई किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी निवेशकों के भरोसे का संकेतक माना जाता है। एसएंडपी ने 14 अगस्त को भारत की रेटिंग BBB- से अपग्रेड कर BBB कर दी थी। इसके अगले ही दिन, स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने कई आर्थिक सुधारों का ऐलान किया था, जिनमें जीएसटी दरों में बदलाव भी शामिल था।
लगातार बढ़ रहा निवेश
वित्त वर्ष 2025-26 में भले ही वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत में एफडीआई का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में नेट एफडीआई बढ़कर 10.75 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले साल की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। वहीं औसत एफडीआई 33% बढ़कर 37.71 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूसरी ओर, भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश भी 44% बढ़कर 10.67 बिलियन डॉलर हो चुका है।




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