दीवाली विश्व विरासत घोषित: यूनेस्को की ऐतिहासिक मान्यता से भारत गौरवान्वित

यह महत्वपूर्ण जानकारी बृजमोहन अग्रवाल, राष्ट्रीय चेयरमैन, कैट द्वारा जारी की गई है। वास्तव में, यूनेस्को द्वारा दीवाली को अमूर्त सांस्कृतिक विश्व विरासत के रूप में मान्यता देना भारत के लिए एक ऐतिहासिक और अत्यंत गर्व का क्षण है। इसके अलावा, यह फैसला दुनिया भर में इस प्रकाश, आशा और सौहार्द के पर्व को मनाने वाले करोड़ों लोगों के लिए सम्मान का प्रतीक है।
साथ ही, यह वैश्विक मान्यता भारत की प्राचीन सभ्यतागत जड़ों की पुष्टि करती है। दीवाली का सार्वभौमिक संदेश—सत्य की असत्य पर, ज्ञान की अज्ञान पर तथा प्रकाश की अंधकार पर विजय—आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इसलिए, इस पर्व को विश्व विरासत का दर्जा मिलना एक व्यापक सांस्कृतिक स्वीकार्यता को प्रदर्शित करता है।
दीवाली की वैश्विक पहचान क्यों महत्वपूर्ण है?
(Synonym Use: सांस्कृतिक विश्व महत्त्व, वैश्विक पहचान, अंतरराष्ट्रीय गौरव)
सबसे पहले, यह मान्यता भारत की सांस्कृतिक शक्ति (Soft Power) को मजबूत करती है। इसके परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को नई ऊर्जा मिलती है। इसके साथ ही, यह निर्णय दुनिया भर में भारतीय मूल्यों और परंपराओं के प्रति जागरूकता को कई गुना बढ़ाता है।
इसके अतिरिक्त, यह घोषणा भारतीय प्रवासी समुदाय (Indian Diaspora) के निरंतर योगदान को भी वैश्विक स्तर पर स्वीकार करती है। वास्तव में, दीवाली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सेतु है जो पूरी मानवता को जोड़ता है।
दीवाली विश्व विरासत मान्यता से भारत की सॉफ्ट पावर मजबूत
यह वैश्विक मान्यता भारत की सॉफ्ट पावर को और सशक्त करेगी। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कूटनीति को बढ़ावा देगी। इसके अतिरिक्त, यह निर्णय भारतीय त्योहारों और परंपराओं के प्रति वैश्विक जागरूकता को भी बढ़ाएगा। नतीजतन, विश्वभर के लोगों में भारत के सांस्कृतिक ethos के प्रति नई समझ विकसित होगी।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और स्थानीय व्यवसायों को कैसे लाभ होगा?
इस वैश्विक मान्यता के बाद, देशभर में दीवाली से जुड़े छोटे व्यवसायों, कलाकारों और शिल्पकारों को विशेष लाभ मिलेगा। इसके अलावा, दीवाली-संबंधित उद्योग—जैसे कि दीपोत्सव सामग्री, सजावट, हस्तशिल्प और मिठाई व्यवसाय—भी नई ऊँचाइयों को छू सकते हैं।
साथ ही, पर्यटन (Tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीवाली की पहचान मजबूत होने से भारत में सांस्कृतिक पर्यटन का दायरा और विस्तृत होगा। परिणामस्वरूप, देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
कैट राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल का धन्यवाद संदेश
अंत में, बृजमोहन अग्रवाल ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उन सभी सांस्कृतिक हितधारकों को हार्दिक बधाई दी है जिन्होंने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को संभव बनाया।
निश्चित रूप से, आज भारत सांस्कृतिक रूप से और अधिक उज्ज्वल हुआ है। इसके साथ ही, यूनेस्को का यह फैसला दीवाली को “विश्व की साझा विरासत” के रूप में स्थापित करता है। इसलिए, अब दीवाली न केवल भारत की, बल्कि पूरी मानवता की सांस्कृतिक धरोहर बन गई है।
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दीवाली अब विश्व का साझा पर्व
अब दीवाली केवल भारत का नहीं, बल्कि विश्व का साझा त्योहार बन गई है। इसके सार्वभौमिक मूल्यों ने इसे वैश्विक समुदायों के बीच एकता, प्रकाश और सकारात्मकता का संदेशवाहक बना दिया है
— बृजमोहन अग्रवाल
राष्ट्रीय चेयरमैन, कैट



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