विधायक शारदा नायक के विरोध से प्रशासन को पीछे हटना पड़ा
राउरकेला: गुरुद्वारा रोड स्थित होटल उत्सव को तोड़ने पहुंची तहसील प्रशासन की टीम को सोमवार को बैरंग लौटना पड़ा।
दरअसल, Hotel Utsav demolition attempt का बीजद विधायक शारदा नायक ने कड़ा विरोध किया।
इस कारण होटल प्रबंधन को तत्काल राहत मिल गई।
वहीं, समर्थकों में विधायक के पुराने तेवर देखकर उत्साह बढ़ा।
सोमवार सुबह करीब दस बजे तहसील प्रशासन बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचा।
टीम में तहसीलदार सलमा मिंज, असिस्टेंट तहसीलदार सुदेशा पटेल और मजिस्ट्रेट रेगन नायक शामिल थे।
पुलिस बल भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौजूद रहा।

Hotel Utsav Demolition Attempt पर पक्षपात के आरोप
होटल उत्सव बीजद विधायक शारदा नायक के करीबी प्रवीण गर्ग और उनके परिवार का है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई अवैध निर्माण मौजूद हैं।
इसके बावजूद प्रशासन ने केवल होटल उत्सव को ही निशाना बनाया।
इसी चयनात्मक कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
MLA Protest Against Demolition ने बदली स्थिति
सूचना मिलते ही विधायक शारदा नायक समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे।
उन्होंने Hotel Utsav demolition attempt का खुलकर विरोध किया।
इसी बीच तहसीलदार ने कोर्ट आदेश का हवाला दिया।
पास के एक मकान का ताला तोड़ने के लिए मजदूर बुलाए गए।
जैसे ही ताला तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई, विधायक बीच में आ गए।
उन्होंने जमीन पर बैठकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई।
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Sub Collector Statement और विधायक का जवाब
उप-कलेक्टर विजय नायक भी मौके पर पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जमीन सरकारी है और खाली कराना अनिवार्य है।
हालांकि, विधायक ने स्पष्ट शब्दों में आपत्ति जताई।
उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बिना कोई तोड़फोड़ नहीं होने दी जाएगी।
इसके बाद प्रशासनिक टीम को पीछे हटना पड़ा।

Supporters Reaction और राजनीतिक असर
घटना के दौरान गोल्डी सिंह, प्रमोद शर्मा, कृष्णा साहू और बाबू खान मौजूद रहे।
इसके अलावा संतोष नायक समेत कई समर्थक विरोध में खड़े दिखे।
पूरे दिन गुरुद्वारा रोड पर हंगामे का माहौल बना रहा।
प्रवीण गर्ग और उनके परिवार ने समर्थकों का आभार जताया।
अब शहर की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।
Gurudwara Road Encroachment Removal Fails
इधर, गुरुद्वारा रोड से कब्जा हटाने की कार्रवाई भी असफल रही।
स्थानीय नागरिकों ने उप-कलेक्टर की भूमिका पर सवाल उठाए।
आरोप है कि कानून से अधिक राजनीतिक दबाव प्रभावी रहा।
लोगों का कहना है कि बस्ती क्षेत्रों में कार्रवाई सख्त है।
लेकिन प्रभावशाली लोगों के मामलों में नरमी दिखाई जाती है।
इससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।



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