गूगल जल्द ही क्वालकॉम के साथ मिलकर पीसी के लिए एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम ला रहा है, जिसका लक्ष्य विंडोज के प्रभुत्व को चुनौती देना और मोबाइल-पीसी के बीच बेहतर अनुभव प्रदान करना है। यह नया गूगल ओएस एंड्रॉयड के इंटरफेस और क्रोमओएस की मल्टी-टास्किंग क्षमताओं को जोड़कर 2026 में लॉन्च हो सकता है, जिससे टेक बाजार में हलचल मची हुई है।
गूगल का नया दांव: अब पीसी और लैपटॉप पर चलेगा एंड्रॉइड

गूगल अपने यूज़र्स को बेहतर अनुभव देने के लिए लगातार नई-नई टेक्नोलॉजी और फीचर्स लेकर आता रहा है। कभी बड़े अपडेट्स तो कभी नए प्रोडक्ट्स, कंपनी हमेशा कुछ नया पेश करती है। अब खबर है कि गूगल जल्द ही पीसी और लैपटॉप सेगमेंट में एंड्रॉइड लाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह क्वालकॉम के साथ पार्टनरशिप कर रहा है। दोनों कंपनियों ने इस हफ्ते हुए स्नैपड्रैगन समिट 2025 में इसकी पुष्टि भी की। इसी दौरान नए क्रोमओएस और एंड्रॉइड का एक टीज़र सामने आया, जो पर्सनल कंप्यूटिंग डिवाइस के लिए पूरी तरह नया प्लेटफॉर्म देने का इशारा करता है।
अभी तक गूगल ने क्रोमओएस पर आधारित लैपटॉप बनाए हैं, जिन्होंने कुछ मामलों में अच्छा प्रदर्शन किया है। लेकिन तुलना करें तो यह विंडोज़, मैकओएस और यहां तक कि लिनक्स से भी काफी पीछे है। गूगल का मानना है कि क्रोमओएस और एंड्रॉइड को मिलाकर ऐसा अनुभव तैयार किया जा सकता है जो मोबाइल और पीसी, दोनों ही दुनियाओं का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो। कंपनी का कहना है कि पीसी के लिए एंड्रॉइड का पहला वर्जन अगले साल आएगा, और यह संभव है कि इसे Google I/O 2026 इवेंट में लॉन्च किया जाए।
एंड्रॉइड पीसी से क्या उम्मीदें?
गूगल ने अभी तक ज्यादा डीटेल्स साझा नहीं की हैं। हालांकि, इतना साफ है कि एंड्रॉइड इंटरफेस और क्रोमओएस की मल्टीटास्किंग क्षमता को जोड़कर कंपनी पीसी के लिए एक नया ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रही है। टैबलेट्स पर एंड्रॉइड का सफर उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया, ऐसे में अब पीसी और लैपटॉप पर बेहतरीन हार्डवेयर के साथ इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी गूगल के पार्टनर्स पर होगी। देखना यह होगा कि पीसी पर चलने वाला एंड्रॉइड कितना तेज़ और स्मूथ एक्सपीरियंस दे पाता है।
क्या विंडोज़ के लिए खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विंडोज़ के लिए एक चुनौती साबित हो सकता है। फिलहाल पीसी सेगमेंट पर माइक्रोसॉफ्ट का लगभग एकाधिकार है। हालांकि, इस बाज़ार में कदम जमाना गूगल के लिए आसान नहीं होगा। एप्पल की अपनी अलग रणनीति है, जबकि गूगल अब सीधे विंडोज़ से टक्कर लेने की तैयारी में है।



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