इस अवसर पर राउरकेला विधायक शारदा नायक ने रथ को हरी झंडी दिखाई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मीनाक्षी नायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।
डीएसपी गुरुवारी हेम्ब्रम ने भी अभियान को समर्थन दिया।
वहीं जिला श्रम अधिकारी गोपाल चंद्र मंगराज ने नारियल फोड़कर शुभारंभ किया।
इसके पश्चात जीता संस्था की जिला संयोजिका मधुस्मिता महापात्र ने अतिथियों का स्वागत किया।
साथ ही रजत एवं हरिप्रिया ने कार्यक्रम संचालन में सहयोग किया।
लहुणीपाड़ा के 50 गांव बनेंगे बाल विवाह मुक्त गांव
जीता संस्था ने बताया कि वर्ष 2030 तक 50 गांवों को बाल विवाह मुक्त बनाया जाएगा।
इसके लिए चार दिनों तक विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
बाद में रथ अन्य ब्लॉकों की ओर रवाना होगा।
इसके अलावा “जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स एलायंस” के सहयोग से 100 दिनों का अभियान जारी है।
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बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिन की विशेष जागरूकता मुहिम
संयोजिका मधुस्मिता महापात्र ने बताया कि फोकस गांवों में लगातार बैठकें हो रही हैं।
इसके साथ ही समुदाय संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इससे लोगों में सकारात्मक सोच विकसित हो रही है।
इसके अलावा स्कूलों में जागरूकता सत्र भी चलाए जा रहे हैं।
स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
किशोर-किशोरियों, सरकारी कर्मचारियों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
धार्मिक नेताओं से लेकर टेंट हाउस संचालकों तक संवाद
बाल विवाह रोकथाम के लिए धार्मिक नेताओं से भी चर्चा की जा रही है।
पुजारियों, कैटरिंग और टेंट हाउस संचालकों को भी जोड़ा गया है।
उन्हें बाल विवाह में किसी भी प्रकार के सहयोग से बचने का संदेश दिया जा रहा है।
इसके परिणामस्वरूप समाज में जागरूकता लगातार बढ़ रही है।
कानून के साथ जनचेतना ही बनाएगी बाल विवाह मुक्त समाज
हालांकि बाल विवाह पर सख्त कानून मौजूद हैं।
लेकिन जागरूकता की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।
इसी कारण यह बाल विवाह मुक्त अभियान शुरू किया गया है।
अंततः संदेश स्पष्ट है।
बाल विवाह मुक्त समाज तभी बनेगा, जब कानून और जनचेतना साथ चलेंगे।



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