एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली के माध्यम से राउरकेला वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है।
साल भर में 270 हाथियों का जीवन सुरक्षित बचाया गया है।
यह उपलब्धि तकनीक और वन्यजीव संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
दरअसल, एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली को पहली बार ओडिशा में लागू किया गया।
इस प्रणाली ने संभावित ट्रेन–हाथी टकराव को प्रभावी रूप से रोका।
इसके परिणामस्वरूप कई बड़ी दुर्घटनाएं टल गईं।
एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली से 880 चेतावनी संदेश जारी
डीएफओ जशोवंत सेठी ने इस उपलब्धि की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 18 नवंबर 2024 तक पांच हाथियों की मृत्यु हुई थी।
ये मौतें ट्रेन दुर्घटनाओं के कारण हुई थीं।
हालांकि, 19 नवंबर 2024 से एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हुई।
इसके बाद से दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई।
31 दिसंबर 2025 तक कुल 880 चेतावनी संदेश प्राप्त हुए।
प्रत्येक चेतावनी में एक से 30 हाथियों के झुंड की पहचान हुई।
इसलिए समय रहते ट्रेनों को सतर्क किया गया।
नतीजतन संभावित हादसे टाले गए।
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रेलवे ट्रैक पर एआई आधारित हाथी सुरक्षा टावर
राउरकेला वन मंडल क्षेत्र संवेदनशील रेल मार्गों से घिरा है।
South Eastern Railway के अंतर्गत रेल लाइनें यहां से गुजरती हैं।
ये रेलमार्ग हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को विभाजित करते हैं।
Howrah–Mumbai main line इस क्षेत्र से होकर गुजरती है।
इसके अलावा Hatia–Bondamunda–Barsuan branch line भी यहीं स्थित है।
दोनों रेलमार्ग बंडामुंडा में आपस में जुड़ते हैं।
इसी चुनौती को देखते हुए चार एआई टावर लगाए गए।
इनमें थर्मल इमेजिंग कैमरे और मोशन सेंसर लगाए गए।
साथ ही मशीन लर्निंग आधारित पहचान प्रणाली भी जोड़ी गई।
टावरों को महिपानी, सोनाखान, डालाकुदर और कुचईटा में स्थापित किया गया।
ये सभी स्थान दुर्घटना संभावित क्षेत्र माने जाते हैं।
कुचईटा क्षेत्र में 34 दुर्घटनाएं टलीं
27 नवंबर 2025 को कुचईटा क्षेत्र में बड़ा हादसा टला।
एक चेतावनी में लगभग 30 हाथियों का झुंड चिन्हित हुआ।
समय पर सूचना मिलने से संभावित टक्कर रोकी गई।
कुचईटा क्षेत्र में कुल 34 घटनाएं रोकी गईं।
साथ ही पूरे वर्ष में 270 हाथियों की जान बचाई गई।
इस प्रकार एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली प्रभावी साबित हुई।
वन्यजीव संरक्षण में तकनीक की बड़ी भूमिका
एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली ने नई दिशा दी है।
यह पहल ओडिशा की पहली एआई आधारित वन्यजीव सुरक्षा परियोजना है।
इसके अलावा यह रेलवे सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निश्चित रूप से तकनीक और संरक्षण का यह समन्वय सराहनीय है।
आगे भी एआई हाथी सुरक्षा प्रणाली को विस्तार देने की योजना है।
इससे हाथियों और रेल यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।



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