होटल व विवाह मंडप निर्माण पर विवाद
राउरकेला में बहुमंजिला कार पार्किंग को लेकर बढ़ा विवाद

बिरसा मुंडा स्टेडियम की बहुमंजिला कार पार्किंग को निजी संस्था को सौंपे जाने पर राउरकेला में विरोध तेज हो गया है।
स्मार्ट सिटी फंड से निर्मित इस बहुमंजिला कार पार्किंग को अब होटल और विवाह मंडप में बदला जा रहा है।
हालांकि, इस निर्णय को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों में असंतोष बढ़ रहा है।
राउरकेला के बिसरा चौक स्थित बिरसा मुंडा एथलेटिक स्टेडियम का निर्माण लगभग 157.21 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था।
इस परियोजना में 9000 दर्शक क्षमता वाला फुटबॉल स्टेडियम बनाया गया था।
इसके अलावा 181 कारों की क्षमता वाली बहुमंजिला कार पार्किंग भी बनाई गई थी।
साथ ही एक आधुनिक स्विमिंग पूल का भी निर्माण किया गया था।
इसका उद्घाटन मार्च 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने किया था।
हालांकि, उद्घाटन के बाद बहुमंजिला कार पार्किंग लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाई गई।
करीब डेढ़ वर्ष तक यह भवन खाली पड़ा रहा।
इसके बाद जिला प्रशासन ने इसे व्यावसायिक उपयोग के लिए निजी संस्था को सौंप दिया।
बहुमंजिला कार पार्किंग में होटल और विवाह मंडप निर्माण
अब सौंदर्यीकरण के नाम पर भवन के बाहरी कांच हटाए जा रहे हैं।
केवल बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था रखी गई है।
ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल को तोड़कर नए निर्माण कार्य शुरू हुए हैं।
दूसरे तल पर 72 कमरों वाला स्टार होटल बनाया जा रहा है।
तीसरे तल पर लगभग 2000 लोगों की क्षमता वाला विवाह मंडप बनाया जा रहा है।
स्मार्ट सिटी बोर्ड के अनुसार केवल दूसरे और तीसरे तल को व्यावसायिक उपयोग की अनुमति थी।
हालांकि, वर्तमान निर्माण कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं।
इस निर्णय को लेकर जनता में आक्रोश देखा जा रहा है।
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राजनीतिक आरोप और जनहित याचिका की चेतावनी
विपक्षी नेताओं ने भाजपा और बीजद नेताओं पर सांठगांठ के आरोप लगाए हैं।
बताया जा रहा है कि 3 करोड़ 80 लाख रुपये की सुरक्षा राशि पर इसे सौंपा गया।
पहले एक भाजपा नेता को जिम्मेदारी दी गई थी।
विरोध के बाद दो बीजद नेताओं को भी जोड़ा गया।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष साबीर हुसैन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि भवन का उपयोग जनहित कार्यों के लिए होना चाहिए था।
उन्होंने होटल निर्माण को गलत निर्णय बताया।
जिला बीजद अध्यक्ष प्रद्युम्न त्रिपाठी ने भी निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार को राजस्व के बजाय जनहित को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रशासन का पक्ष
स्मार्ट सिटी की सीईओ, एडीएम व निगम आयुक्त दीना दस्तगीर ने सफाई दी है।
उन्होंने कहा कि परियोजना पूर्ण हो चुकी है।
रखरखाव के लिए राजस्व की आवश्यकता है।
टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से निजी संस्था का चयन किया गया है।
समझौते में मैच के दिनों में बेसमेंट पार्किंग उपलब्ध कराने की शर्त शामिल है।

निष्कर्ष
बिरसा मुंडा स्टेडियम की बहुमंजिला कार पार्किंग को लेकर विवाद लगातार गहरा रहा है।
हालांकि, प्रशासन इसे राजस्व और रखरखाव का उपाय बता रहा है।
लेकिन, दूसरी ओर नागरिक इसे जनहित के खिलाफ निर्णय मान रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह मामला न्यायालय तक पहुंचता है या समाधान निकलता है।


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