जनजातीय विकास और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित रहे सत्र
राउरकेला :
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ओडिशा पश्चिम स्वर्ण जयंती सम्मेलन का दूसरा दिन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन सेक्टर-6 स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में किया गया।
सम्मेलन में छात्र नेतृत्व, संगठनात्मक भूमिका और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
इसके साथ ही जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया।
छात्र नेतृत्व और संगठनात्मक भूमिका पर विचार
प्रातः सत्र में एबीवीपी के पूर्व अखिल भारतीय जनजातीय कार्य प्रमुख प्रमोद राउत ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।
उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में एबीवीपी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया।
उन्होंने छात्र समस्याओं के समाधान को संगठन की प्राथमिकता बताया।
साथ ही संगठन विस्तार को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा।
इसके अलावा उन्होंने जनजातीय समाज के सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया।
उन्होंने एबीवीपी के “चलो कश्मीर” अभियान का उल्लेख भी किया।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाले कार्यकर्ताओं के साहस की सराहना की।
इस दौरान जनजातीय क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्यों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
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समय प्रबंधन पर केंद्रीय मंत्री का प्रेरक संबोधन
द्वितीय चरण में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री एवं सुंदरगढ़ सांसद जुएल ओराम ने छात्रों को संबोधित किया।
उन्होंने जीवन में समय प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताया।
उन्होंने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को प्रेरित किया।
साथ ही लक्ष्य केंद्रित जीवन अपनाने का संदेश दिया।

भव्य शोभायात्रा और खुला अधिवेशन
संध्या सत्र में बिसरा चौक से उदित नगर आंबेडकर चौक तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।
मार्ग में युवाओं और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
इसके पश्चात आयोजित खुली सभा में एबीवीपी राष्ट्रीय सचिव श्रवण बी. राज मुख्य वक्ता रहे।
उन्होंने देशभक्ति नारों के साथ युवाओं में ऊर्जा भरी।
उन्होंने भारत की एकता और अखंडता पर बल दिया।
साथ ही ओडिशा में भगवान बिरसा मुंडा के योगदान की सराहना की।
छात्र समस्याओं पर एबीवीपी का स्पष्ट पक्ष
इस अवसर पर एबीवीपी पश्चिम ओडिशा प्रांत सचिव स्वेतांशु शेखर बरई ने प्रमुख मांगें रखीं।
उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रिक्त पद शीघ्र भरने की मांग की।
उन्होंने 45 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने पर जोर दिया।
साथ ही भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार और बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की।
व्यापक सहभागिता से सम्मेलन सफल
सम्मेलन में 600 से अधिक छात्र कार्यकर्ता शामिल हुए।
इसके अलावा 100 से अधिक शिक्षक भी उपस्थित रहे।
वरिष्ठ पदाधिकारियों और शुभेच्छुओं की भी उल्लेखनीय सहभागिता रही।
सम्मेलन ने छात्र समाज को नई दिशा देने का कार्य किया।



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